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भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार विक्रम सेन का प्रतिशोधात्मक उत्पीड़न। Retaliatory harassment of senior journalist Vikram Sen, who raised his voice against corruption

 भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार विक्रम सेन का प्रतिशोधात्मक उत्पीड़न


महाभ्रष्ट कलेक्टर डॉ. अभय बेडेकर पर गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने हेतु 19 अगस्त 2025 को निजी परिवाद न्यायालय में स्वीकार


*21 धाराओं में दर्ज प्रकरण की प्रक्रिया शुरू*


आलीराजपुर, 19 अगस्त 2025।

वरिष्ठ पत्रकार एवं निर्वाचित जनप्रतिनिधि विक्रम सेन (नेता प्रतिपक्ष, नगर पालिका परिषद, आलीराजपुर) ने आज माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC), जिला आलीराजपुर की अदालत में कलेक्टर डॉ. अभय बेडेकर एवं जनसंपर्क अधिकारी अभिषेक सोलंकी सहित अज्ञात सह-अभियुक्तों के विरुद्ध गंभीर आपराधिक धाराओं के अंतर्गत निजी परिवाद (Private Complaint) दायर किया है, जो स्वीकार हो कर दर्ज कर प्रक्रिया शुरू हो गई हैं।




परिवाद का विवरण :


प्रस्तुति दिनांक : 19.08.2025


धारा 200 दं.प्र.सं. सहपठित धारा 156(3) दं.प्र.सं. के अंतर्गत प्रस्तुत।


आरोपीगण पर लगाए गए मुख्य आरोप


परिवाद में कलेक्टर डॉ. अभय बेडेकर पर भ्रष्टाचार, कूटरचना, झूठे प्रकरण गढ़ने, न्यायालय को गुमराह करने, पत्रकारिता व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करने तथा सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल करने के आरोप लगाए गए हैं।


प्रमुख धाराएँ


भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 –

धारा 175(3), 198, 201, 257, 258, 318(3), 335, 336(1)(2)(4), 338, 340(1)(2), 351(1)(2)(3), 356(1)(2), 409, 420, 467, 468, 471, 500, 120B


भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 –

धारा 7, 13(1)(d), 13(2)

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 –

धारा 66, 72


घटना की पृष्ठभूमि


विक्रम सेन ने ₹1000 करोड़ से अधिक की शाही पुश्तैनी संपत्तियों की संदिग्ध फर्जी वसीयत व अवैध नामांतरण घोटाले का खुलासा किया, जिसमें कलेक्टर डॉ. बेडेकर की सीधी भूमिका सामने आई।


इसके प्रतिशोध स्वरूप, आरोपियों ने उनके खिलाफ झूठी FIR (क्रमांक 06/2025), जिला बदर नोटिस व आदेश जारी किए।


जिला बदर आदेश में 14 प्रकरण दर्शाए गए, जिनमें से 10 मामलों में विक्रम सेन 15 वर्ष पूर्व दोषमुक्त हो चुके हैं, 1 प्रकरण पुलिस द्वारा खारिज, 2 उच्च न्यायालय में लंबित।


बावजूद इसके, 13.08.2025 को जिला बदर आदेश पारित किया गया, ताकि 14.08.2025 को हाईकोर्ट में लंबित मामले की सुनवाई से पूर्व न्यायालय को गुमराह किया जा सके।


10.07.2025 को जारी नोटिस को अवैध रूप से सोशल मीडिया पर वायरल कर उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल किया गया।


प्रस्तुत साक्ष्य


फर्जी वसीयत व नामांतरण आदेश की प्रतियाँ


जिला बदर नोटिस व आदेश की प्रतिलिपियाँ व सोशल मीडिया स्क्रीनशॉट (65B प्रमाणपत्र सहित)


ऑडियो कॉल रिकॉर्ड (पटवारी को धमकाने व रिश्वत लेने संबंधी)


समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टें


FIR 06/2025 व चालान प्रतिलिपियाँ


लोकायुक्त द्वारा दर्ज FIR का विवरण


पत्रकारिता अधिमान्यता से संबंधित दस्तावेज़


विधिक समर्थन एवं नज़ीरें


परिवाद में कई सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला दिया गया है, जैसे—


ललिता कुमारी बनाम राज्य (2014) – संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करना अनिवार्य।


भजनलाल प्रकरण (1992) – प्रतिशोधात्मक FIR पर रोक।


रोमेश थापर (1950) – प्रेस की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार।


सुबरामण्यम स्वामी (2016) – प्रतिष्ठा अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित।


न्यायालय से प्रार्थना


1. पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर को निर्देशित किया जाए कि FIR दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना कराई जाए।


2. आरोपीगण के विरुद्ध उपरोक्त धाराओं में आपराधिक अभियोजन चलाया जाए।


3. परिवादी व उनके परिवार की जान–माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


4. न्यायालय परिस्थितियों व न्यायहित में अन्य आवश्यक आदेश पारित करे।


निष्कर्ष


पत्रकार विक्रम सेन द्वारा दायर इस विस्तृत परिवाद ने कलेक्टर डॉ. अभय बेडेकर के भ्रष्टाचार, शक्ति-दुरुपयोग और प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों को उजागर कर दिया है। अब न्यायालय के सामने यह गंभीर प्रश्न है कि क्या लोकतंत्र में पत्रकारिता और जनता की आवाज़ उठाने वालों को सत्ता–संरक्षित भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने पर इस तरह प्रताड़ित किया जाएगा?

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